मैनपुरी, मार्च 27 -- किशनी। ग्राम बंसरमऊ में आयोजित भागवत कथा का शुक्रवार को सुदामा चरित्र के साथ समापन हो गया। कथावाचक आचार्य गोपाल द्विवेदी ने कहा कि मित्रता कृष्ण और सुदामा जैसी होनी चाहिए। आजकल मनुष्य स्वार्थ के लिए प्रीत करता है। सुदामा ने श्रीकृष्ण से छिपाकर चने खाए और आगे चलकर वह निर्धन और कृष्ण द्वारिका के राजा हुए। पत्नी सुशीला के कहने पर सुदामा अपने मित्र से मिलने द्वारिका पहुंचे तो द्वारपालों ने उन्हें रोक दिया। श्रीकृष्ण को सुदामा के आने की खबर मिली तो वह दौड़े चले आए और सुदामा को गले से लगाया। आयोजक शेखर चौहान ने बताया कि आज शनिवार को भंडारे का आयोजन होगा। सभी लोग प्रसाद पाने के लिए समय से पहुंचे। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए ताकत युवा की, दिमाग बुजुर्ग का जरूरीकिशनी। नगर स्थित सांईधाम पर आयोजित रामकथा के अंतिम दिन भक्तों की भीड़...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.