मेरठ, जून 1 -- प्राणियों के जीवन के अनुपालन एवं संरक्षण में सहायता करना, दूसरों के दुखों को बांटना और अपनी अत्यंत सुख सुविधाओं का दूसरों के लिए त्याग करना अहिंसा का पहला सूत्र है। मनुष्य को इसे अपनाकर धर्म लाभ अर्जित करना चाहिए। उक्त प्रवचन श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर पर चल रहे श्री शांतिनाथ विधान के मध्य आचार्य भाव भूषण महाराज ने प्रवचन करते हुए कहे। त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 12 वें दिन मुख्य वेदी पर विराजमान भगवान का जलाभिषेक किया गया। तत्पश्चात् सोमवार को भगवान की शांतिधारा संजीव जैन, आकर्ष जैन, वर्षा जैन, आस्था जैन आदि ने की। सांयकाल में श्रद्धालुओं ने भगवंतों की आरती कर पुण्य का संचय किया। विधान में 120 परिवारों ने भाग लिया। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम में गुरुकुल के छात्रों ने प्रस्तुति द...