आजमगढ़, मार्च 22 -- आजमगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन शनिवार को आदिशक्ति के तीसरे स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा की गई। भक्तों ने चंदन, रोली, हल्दी और फूल चढ़ाकर विधि-विधान से देवी का पूजन-अर्चन किया। देवी मंदिरों में दिनभर जयकारा गूंजता रहा। दर्शन-पूजन के लिए सुबह से शाम तक कतारें लगी रहीं। कहा जाता है कि देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण इनका नाम 'चंद्रघंटा' पड़ा। ये सुनहरे रंग की हैं और सिंह पर सवार हैं। दस हाथों में अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं। मां दुर्गा का यह रूप शांतिदायक, कल्याणकारी और राक्षसों का विनाश करने वाला माना जाता है। मातारानी का यह रूप साहस, शक्ति और निर्भयता का प्रतीक है। वे भक्तों को सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं और उनकी रक्षा करती हैं। शनिवार को भक्तों ने मां की प्रतिमा पर चंदन, रो...