रांची, दिसम्बर 9 -- रांची, विशेष संवाददाता। केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) के शिक्षा, अर्थशास्त्र एवं विकास अध्ययन विभाग की ओर से आयोजित सामाजिक विज्ञान में मात्रात्मक एवं गुणात्मक शोध विधियां विषय पर आईसीएसएसआर-प्रायोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम (सीबीपी) में मंगलवार को मात्रात्मक शोध पद्धति: मेटा-विश्लेषण पर चर्चा हुई। इसमें डॉ आलोक राज, सह प्राध्यापक, प्रोडक्शन, ऑपरेशंस एंड डिसीजन साइंसेज विभाग, एक्सएलआरआई, जमशेदपुर ने चर्चा की। उन्होंने बताया कि मेटा विश्लेषण अलग-अलग शोध अध्ययनों के परिणामों को जोड़कर एक बड़ा और मजबूत निष्कर्ष तैयार करता है। इससे शोध अधिक विश्वसनीय बनता है। उन्होंने, कोरिलेशन मैट्रिक्स, पब्लिकेशन बायस, फॉरेस्ट प्लॉट और इफेक्ट साइज जैसी अवधारणाओं को सरल उदाहरणों के साथ समझाया। उन्होंने यह भी बताया कि अलग-अलग शोध...