सीतामढ़ी, अप्रैल 23 -- सुरसंड। भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती सख्ती का असर सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक जीवन पर दिखाई देने लगा है। सदियों पुराने बेटी-रोटी के संबंध अब कागजी प्रक्रियाओं, समय-सीमा और दूरी की बाधाओं में उलझते जा रहे हैं। सर्वाधिक प्रभावित वे बेटियां हैं, जिनकी शादी नेपाल में हुई है और जिन्हें मायके आने-जाने में अब पहले जैसी सहजता नहीं मिल रही है। पहले जो दूरी कुछ मिनटों में तय हो जाती थी, अब वही यात्रा जटिल नियमों और जांच प्रक्रियाओं के कारण लंबी और थकाऊ बन गई है। कई जगहों पर महज 30 मीटर की दूरी तय करने के लिए लोगों को भिठ्ठामोड़ बॉर्डर के रास्ते करीब 60 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। यह भी पढ़ें- महीने भर में होने लगा बालेन सरकार से मोहभंग सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक की निर्धारित समय-सीमा ने भी सामाजिक...