सिल्ट की परत में छिपी बर्बादी, न फसल बची न बची जमीन
मधुबनी, अगस्त 11 -- झंझारपुर। झंझारपुर में बह रही कमला बलान नदी में हर साल आने वाली बाढ़ किसान और खेती के लिए दोहरी मार लेकर आती है। नदी के कटाव और बालू जमा होने से उपजाऊ जमीन लगातार घटती जा रही है, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। कमला बलान नदी का जलस्तर बढ़ने से हर साल सैकड़ों एकड़ खेत जलमग्न हो जाते हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेतों में जमा होने वाली भारी सिल्ट (गाद) और बालू के कारण जमीन पूरी तरह बंजर हो जाती है। इसके चलते खरीफ और रबी, दोनों सीजन की फसलों का उत्पादन लगातार घट रहा है, और किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। केवल झंझारपुर और लखनौर प्रखंड की बात करें, तो छोटे, मंझोले और बड़े किसानों की 200 एकड़ से भी अधिक उपजाऊ जमीन अब खेती के लायक नहीं बची है。
बाढ़ और सिल्टेशन से चौपट हो रही खेतीबा...
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