गोरखपुर, मई 5 -- गोरखपुर, निज संवाददाता दाम बढ़ने के बाद कॉमर्शियल गैस सिलेंडर छोटे दुकानदारों ओर ठेले वाले के पहुंच के बाहर हो गया है। अब वह कोयले की भट्ठी और डीजल चूल्हे पर टिक्की, चाट और समोसे बना रहे हैं। वह घर से ही छोले और गोलगप्पे लकड़ी के चूल्हे पर तैयार करके ला रहे हैं। लकड़ी और कोयले का प्रतिदिन का खर्चा करीब 700 रुपये आ रहा है। वहीं, एक कॉमर्शियल सिलेंडर दो से तीन दिन चलने के कारण प्रतिदिन पर प्रतिदिन का खर्चा 1000 रुपये के ऊपर होगा। उधर, सिलेंडर नहीं मिलने और महंगा होने के कारण कई टिक्की और मोमो वाले शिकंजी, नीबू सोडा, सत्तू और जूस बेचने लगे हैं। यह भी पढ़ें- ग्राहकों की संख्या कम होने से डर रहे मझोले विक्रेता कीमत बढ़ाने सेठेले वालों की चुनौतियाँ तरंग ओवर ब्रिज के नीचे चाट-गोलगप्पे का ठेला लगाने वाले महेंद्र का कहना है कि लाल...