दरभंगा, नवम्बर 20 -- हजारों गरीब परिवार की महिलाएं सिलाई, बुनाई, कढ़ाई के काम से जुड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। इन महिलाओं की मेहनत से न केवल घर की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती थीं, बल्कि परिवार की आय में भी संतुलन बना रहता था। हालांकि हाल के दिनों में हालात तेजी से बदले हैं। सिलाई-बुनाई से जुड़े काम लगभग बंद हो जाने के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं अचानक बेरोजगारी का शिकार हो गई हैं। नतीजा यह है कि उनकी आर्थिक स्थिति पहले से भी अधिक बिगड़ गई है और कई परिवारों पर संकट गहराता जा रहा है। रूबी खातून कहती हैं कि पहले हमें मार्केट के टेलरिंग शॉप से पीस के हिसाब से काम करने को मिल जाता था, लेकिन रेडिमेड कपड़ों का चलन बढ़ने से इनके कामकाज पर बुरा प्रभाव पड़ा है। अब इनके आर्थिक स्रोत करीब करीब बंद से ...
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