प्रयागराज, फरवरी 25 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल लगान की रसीदों के आधार पर कोई व्यक्ति किसी कृषि भूमि का कानूनी किरायेदार होने का दावा नहीं कर सकता है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कानपुर के एक 45 साल पुराने दीवानी मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास पट्टा या अन्य कोई औपचारिक लीज दस्तावेज नहीं है, तो मात्र रसीदें उसे किरायेदार का दर्जा दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और ऐसी स्थिति में उसका कब्जा केवल एक 'लाइसेंसधारी' या 'अतिक्रमणकारी' के रूप में ही माना जाएगा। यह मामला मूल रूप से वर्ष 1971 में शुरू हुआ था, जब वादी देवी दयाल ने नगर महापालिका कानपुर के विरुद्ध स्थायी निषेधाज्ञा के लिए एक वाद दायर किया था। वादी का कहना था कि वह विवादित भूखंडों पर एक किरायेदार के रूप में खेती कर रहा है...