नई दिल्ली, अक्टूबर 2 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने एक स्वीडिश महिला की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी होने को इस बात का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता कि किसी व्यक्ति ने हिंदू धर्म अपना लिया है या वह हिंदू मैरिज एक्ट के तहत शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए हिंदू है। कोर्ट ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत शादी तभी वैध मानी जाती है जब वह दो हिंदुओं के बीच हिंदू कानून में बताई गई जरूरी रस्मों और परंपराओं के अनुसार हुई हो। स्वीडिश महिला ने दिल्ली रेवेन्यू डिपार्टमेंट की उन गाइडलाइंस को चुनौती दी थी, जिसमें हिंदू मैरिज एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी है कि पति-पत्नी में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो और मैरिज ऑफिसर के अधिकार क्षेत्र में स्थायी रूप से रहता हो। महिला ने मार्च में एक स्वीडिश पुरुष से शादी की थी। उसने ...