वाराणसी, मई 7 -- वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। यूरिनरी ब्लडैर कैंसर (यूरिन की थैली का कैंसर) की पहचान एमआरआई, सीटी स्कैन या सिस्टोकॉपी जैसी महंगी जांच की बजाय अब सिर्फ यूरिन के सैंपल के परीक्षण से ही सटीक तरीके से की जा सकेगी। बीएचयू के वैज्ञानिकों ने यूरिन में मौजूद एक्सोसोमल माइक्रोआरएनए की खोज की है। इससे न सिर्फ कैंसर की पहचान हो सकेगी, बल्कि उसकी स्टेज भी पता चलेगा। वैज्ञानिक भविष्य में प्रेगनेंसी किट की तरह इसके लिए जांच किट बनाने में जुटे हैं।
यूरिनरी ब्लैडर कैंसर की पहचान के लिए उपलब्ध संसाधनों यूरिनरी ब्लैडर कैंसर की पहचान के लिए उपलब्ध संसाधनों से एक मरीजों पर कम से कम आठ से दस हजार रुपये खर्च होते हैं। इसके बाद बाद भी कई बार रिपोर्ट सही नहीं होती है। इसको देखते हुए बीएचयू के विज्ञान संस्थान के जैव प्रौद्योगिकी विभाग और आईएमएस ब...
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