विधि संवाददाता, अगस्त 5 -- Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि वैवाहिक मामलों में पत्नी की सुविधा और नाबालिग बच्चे का हित निश्चित रूप से महत्वपूर्ण पहलू हैं, लेकिन केवल इन्हीं आधारों पर किसी मुकदमे को एक अदालत से दूसरी अदालत स्थानांतरित (ट्रांसफर) नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रांसफर का वास्तविक आधार यह होना चाहिए कि यदि मामला स्थानांतरित नहीं किया गया तो न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न होगी या न्याय विफल होने की आशंका होगी। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की। जिसमें पत्नी ने पति द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत दायर दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापन की याचिका को अलीगढ़ फैमिली कोर्ट से गौतम बुद्ध नगर फैमिली कोर्ट स...