रांची, अगस्त 6 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने कर्ज की रकम नहीं चुकाने से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि सिर्फ लोन की राशि बकाया रहने या उसे वापस नहीं कर पाने के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का मामला नहीं बनता। धोखाधड़ी का अपराध तभी बन सकता है, जब यह आरोप हो कि लेन-देन की शुरुआत से ही संबंधित व्यक्ति की नीयत बेईमानी या धोखा देने की थी। जस्टिस अनिल चौधरी की अदालत ने इसी आधार पर बिमलेंदु शेखर झा के खिलाफ देवघर में चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। अदालत ने एसडीजेएम देवघर के पारित आदेश को भी निरस्त कर दिया। इस आदेश में प्रार्थी के खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला पाया गया था। मामले के अनुसार, बिमलेंदु शेखर झा ने बैंक ऑफ इंडिया की देवघर शाखा में कार्यरत रहने के दौरान...