नई दिल्ली, जुलाई 29 -- कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा राजनीति में बढ़ते भ्रष्टाचार और धन-बल पर चिंता व्यक्त करते हुए राजनीति से संन्यास लेने की बात कहना स्वाभाविक ही चर्चा का विषय बन गया है। सूबाई राजनीति में उनकी गिनती एक प्रभावी नेता के रूप में होती है, इसलिए उनके इस बयान के गहरे निहितार्थ हैं। यह बताता है कि भारतीय राजनीति में लगातार आई गिरावट से वह क्षुब्ध हैं। सच भी यही है कि जिस शुचिता की कल्पना की गई थी, वह राजनीति में अब दिख नहीं रही है। आज की राजनीति पहले की तुलना में अधिक खराब हो गई है। मौजूदा विकृतियों और विसंगतियों का ही संकेत है कि आज कई नेता खुद को इस राजनीति के अनुकूल नहीं पा रहे। बेशक, सभी राजनेता भ्रष्ट नहीं हैं या वे भ्रष्ट आचरण में लिप्त नहीं होते, लेकिन राजनीतिक दलों में जिस तरह की उठा-पटक देखी जाती है...