बागपत, जून 29 -- बड़ौत। 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर की अनदेखी अब सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर भारी पड़ सकती है। पूर्वी यमुना नहर के चौड़ीकरण और पटरी निर्माण के दौरान नहर किनारे वर्षों से लावारिस पड़ा वह ऐतिहासिक कोल्हू का पाट गायब हो गया, जो 1857 के अमर क्रांतिकारियों की शहादत का मौन साक्षी माना जाता था। अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति के दौरान 23 क्रांतिकारियों को इसी कोल्हू में पिलवाकर निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद यह कोल्हू का पाट वर्षों तक पूर्वी यमुना नहर की पटरी पर ऐतिहासिक अवशेष के रूप में लावारिस हालत में पड़ा रहा। यह भी पढ़ें- कब्जा हटाने के लिये गम्भीर नही सिंचाई विभाग इसे सुरक्षित और संरक्षित करना तो दूर पूर्वी यमुना नहर चौड़ीकरण के दौरान दौरान विभागीय लापरवाही अथवा उदासीनता के चलते यह ...