गोरखपुर, जनवरी 9 -- गोरखनाथ मंदिर परिसर में चल रहे खिचड़ी मेले में इस बार केवल झूले, खानपान और मनोरंजन ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश भी देखने को मिल रहा है। सिंगल यूज प्लास्टिक के बढ़ते चलन को चुनौती देने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से आए पुस्तैनी कारीगर अपने पारंपरिक उत्पादों के साथ मेले में उतरे हैं। इनमें बांस से बने घरेलू और सजावटी सामान खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। खिचड़ी मेला इन कारीगरों के लिए केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि आजीविका का बड़ा सहारा भी बन रहा है। असम राज्य से आए कारीगर जहुरुल इस्लाम बांस से तैयार किए गए बोतल, कप, गिलास, टोकरी, गिफ्ट आइटम और भगवान की मूर्तियां बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके स्टॉल पर रखी सभी वस्तुएं पूरी तरह बांस से बनी हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ टिकाऊ भी है...
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