भागलपुर, मार्च 11 -- भागलपुर, कार्यालय संवाददाता। साहित्य हमारी कल्पना शक्ति को विकसित करता है। साहित्य एवं विज्ञान को एक दूसरे पर निर्भरता उसके महत्व एवं अनिवार्यता को बताता है। विज्ञान को साहित्य की आवश्यकता नहीं है, जबकि साहित्य को ज्ञान की आवश्यकता होती है। साहित्य से हमें आनंद मिलता है, जबकि विज्ञान हमारी आवश्यकता भी है। यह बातें मंगलवार को टीएमबीयू के पीजी अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य वक्ता प्रो. सुभाजीत सेन गुप्ता ने कही। उन्होंने साहित्य और विज्ञान के बीच विनिमय एवं संपर्क के बारे में कई सवाल खड़े किए एवं अपने अध्ययन तथा अनुभव को विस्तारपूर्वक रखा। नवनिर्मित दिनकर भवन में आयोजित सेमिनार का विषय 'साहित्य और विज्ञान : एक नई विधा का जन्म' रखा गया है। हेड डॉ. आरती सिन्हा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता ...
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