गया, फरवरी 19 -- मगध विश्वविद्यालय के हिंदी और मगही विभाग द्वारा गुरुवार को हिंदी भवन स्थित प्रेमचंद सभागार में 'साहित्य और साहित्येतिहास का अंतर्संबंध' विषयक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. प्रभाकर सिंह ने कहा कि समाज में परिवर्तन के साथ साहित्य का स्वरूप बदलता है और उसी के अनुरूप उसके इतिहास लेखन की दृष्टियां भी रूपांतरित होती रहती है। उन्होंने औपनिवेशिक, नवजागरण, मार्क्सवादी तथा सबाल्टर्न/हाशिये के विमर्शों के संदर्भ में साहित्येतिहास की विभिन्न प्रवृत्तियों की चर्चा की। प्रो. सिंह ने गारसादतासी और ग्रियर्सन द्वारा लिखित आरंभिक औपनिवेशिक इतिहासों का उल्लेख करते हुए आचार्य रामचंद्र शुक्ल, रामविलास शर्मा और हजारी प्रसाद द्विवेदी के इतिहास लेखन को नवजागरण और स्वतंत्रता...