साहित्यिक काव्य संगम की आॅनलाइन गोष्ठी
मधुबनी, अक्टूबर 7 -- मधुबनी। 'बरन काव्य संगम' के तत्त्वावधान में राष्ट्र, राज्य, समाज को समर्पित साहित्यिक काव्य संगम की आनलाईन गोष्ठी मंगलवार को संगम के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. शुभ कुमार वर्णवाल की अध्यक्षता एवं कवयित्री पूनम देवी पृथा के कुशल संचालन में हुई। शुरुआत मंजुला बरनवाल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई।
कार्यक्रम की प्रमुख गतिविधियाँ प्रो. वर्णवाल द्वारा रचित 'बरन काव्य संगम' कुलगीत 'जय-जय बरन काव्य संगम' की प्रस्तुति सोनी बरनवाल 'कशिश' द्वारा दी गई। केदारनाथ बरनवाल, जैनामोड़, बोकारो 'भजो रे मन राम नाम सुखदायी' सोनी बरनवाल कशिश, जमुई 'सबकी अपनी कलम है', मंजुला बरनवाल, बंगलोर 'पितृ लोक से धरा पर आते पितृ भगवान', खूशबू बरनवाल आदि की रचनाई सराही गई। शिक्षिका माधवी बरनवाल, वारसलीगंज, नवादा 'होती नौ रूपों की पूजा-इंतजार करते हर व...
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