वाराणसी, जुलाई 21 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। सावन का हर दिन शिवार्चन के लिए विशिष्ट है। बात सोमवार की हो तो सोने में सुहागा। यदि सावन में सोमवार पर कोई तिथि विशेष पड़ गई तो भोले भक्तों के लिए यह सोने में सुगंध है। कुछ ऐसा ही इस वर्ष 30 जुलाई से आरंभ हो रहे सावन में होने वाला है। अबकी सावन में बनने वाले कुछ महासंयोग इस महीने के महात्म्य में वृद्धि कर रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख नागपंचमी है। इस वर्ष श्रावण शुक्ल पंचमी माह के तीसरे सोमवार 17 अगस्त को पड़ेगी। सोमवार और पंचमी का महासंयोग 23 वर्षों बाद बना है। काशी में इस पर्व की महत्ता सिर्फ नागदेव के पूजन तक ही सीमित नहीं। नागपंचमी, अनादिकाल से चली आ रही काशी की अखंड विद्वत परंपरा का प्रतीक भी है। तिथि विशेष पर सामान्य गृहस्थ नागदेव का पूजन कर कृतार्थ होते हैं। वहीं काशी के विद्वतजन शास्त्री...