गंगापार, अगस्त 24 -- लाल रंग का वह लेटर बॉक्स... जो कभी भाई-बहन के स्नेह का सबसे भरोसेमंद जरिया हुआ करता था, अब वह अपनी पहचान खोता जा रहा है। सावन का महीना शुरू हो चुका है और रक्षाबंधन नजदीक है, लेकिन गांवों के डाकघरों पर लगे अधिकांश लेटर बॉक्स सूने पड़े हैं। एक समय ऐसा था जब इन्हीं बॉक्स में डाली गई राखियां, खत और शुभकामना पत्र सैकड़ों किमी दूर बैठे भाइयों तक बहनों का स्नेह पहुंचाते थे। अब उनकी जगह मोबाइल स्क्रीन, व्हाट्सएप, वीडियो कॉल और ऑनलाइन डिलीवरी ने ले ली है। करीब एक-दो दशक पहले रक्षाबंधन से पहले डाकघरों में सुबह से शाम तक चहल-पहल रहती थी। बहनें राखी, चिट्ठी लेकर पहुंचती थीं। लेटर बॉक्स जल्दी भर जाते थे और डाक कर्मचारी उन्हें दिन में कई बार खाली करते थे। अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। कई लेटर बॉक्स पूरे दिन में मुश्किल से कुछ ही ...