नई दिल्ली, दिसम्बर 19 -- क्या आपने कभी सोचा है कि जिस हवा में आप सांस ले रहे हैं, वह न सिर्फ आपके फेफड़ों को काला कर रही है, बल्कि आपकी यादों को भी मिटा रही है? आज किसी भी न्यूरोलॉजिस्ट के क्लिनिक में सिर्फ 70-80 साल के बुजुर्ग लोग ही नहीं, बल्कि 30 और 40 साल की उम्र के युवा भी याददाश्त की कमी (Brain fog) और संज्ञानात्मक गिरावट (Cognitive decline) की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (साकेत) के हेड न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. (कर्नल) जॉय देव मुखर्जी कहते हैं कि हवा में प्रदूषण लगातार खबरों में बना रहता है, और हम अक्सर ऐसे परिवारों से मिलते हैं जो अपने बुजुर्ग माता-पिता में याददाश्त कम होने को लेकर चिंतित रहते हैं। वे पूछते हैं कि क्या प्रदूषण इसका कारण हो सकता है। इसके अलावा उनके मन को यह सवाल भी अकसर परेशान करता है कि क्या...
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