नई दिल्ली, दिसम्बर 5 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि सार्वजनिक लेन-देन में सरलता ही 'सुशासन' है। इसी के साथ अदालत ने झारखंड सरकार के 2009 के उस निर्देश को खारिज कर दिया, जिसमें स्टाम्प शुल्क में छूट मांगने वाली सहकारी समितियों के लिए अतिरिक्त बाधाएं लगा दी गई थीं। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि ऐसे कार्यकारी आदेश जो 'अनावश्यक और अत्यधिक शर्तें' थोपते हैं, अवैध हैं और उन्हें रद्द किया जाना चाहिए। फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि सार्वजनिक लेन-देन में सरलता ही सुशासन है। संवैधानिक अदालतें कानून के शासन को सुदृढ़ करने और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए इस गुण को बनाए रखती हैं। प्रशासनिक कानून में, सरलता का अर्थ है कि कानून, नियम और प्रक्रियाएं स्पष्ट, सरल और समझने में आसान होनी चा...
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