नई दिल्ली, जुलाई 28 -- बात 2014 की है जब 21 वर्षीय सारांश जैन इंदौर के एक क्लब की टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रहे थे और सीमित ओवरों की क्रिकेट में अपना सपना साकार करने की कोशिश में लगे थे। उस समय वह जब भी फोन करके अपने पिता सुबोध जैन के बारे में पूछते तो उनकी मां या बड़ा भाई बताते कि वह अभी व्यस्त हैं। उनके पिता उनके पहले और एकमात्र कोच भी थे। जब सारांश वापस घर लौटे तो सच्चाई ने उन्हें बुरी तरह झकझोर दिया। उनके पिता को मुंह का कैंसर हो गया था। सारांश के पिता 61 वर्षीय सुबोध ने कहा, ''सर्जरी के बाद मेरा मुंह बुरी तरह सूज गया था और मैं बोल नहीं पा रहा था। जैसे ही सारांश ने मुझे देखा, वह फूट-फूट कर रोने लगा।'' उन्होंने कहा, ''मैंने कलम उठाई और कागज के एक टुकड़े पर लिखा, 'बेटा, तू जितना अच्छा करेगा, मैं उतनी जल्दी ठीक हो जाऊंगा।'''तब सा...