सारंडा के जंगल में ढह गया लाल आतंक का किला
जमशेदपुर, जुलाई 29 -- पश्चिमी सिंहभूम का सारंडा जंगल कभी भाकपा (माओवादी) का सबसे मजबूत ठिकाना माना जाता था। यह जंगल संगठन के लिए सुरक्षित शरणस्थली, प्रशिक्षण केंद्र, हथियार और विस्फोटक छिपाने का अड्डा तथा सुरक्षा बलों पर हमलों की रणनीति बनाने का प्रमुख बेस कैंप था। कई वर्षों तक संगठन के जोनल और सब जोनल दस्ता यहां से पूरे कोल्हान क्षेत्र में गतिविधियां संचालित करते रहे। रांची में मंगलवार को आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश माओवादी इन्हीं दस्तों का हिस्सा रहे। दस्तावेज के अनुसार, इनपर वर्ष 2020 से 2026 के बीच सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले, आईईडी विस्फोट, ग्रामीणों की हत्या और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने जैसी कई गंभीर घटनाओं में शामिल रहने के आरोप हैं। माओवादियों ने कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया, जिनमें चंदन लोहरा, जयकांत उर्फ बंगाली मुंडा, संत...
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