प्रयागराज, मार्च 27 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि परीक्षा के बाद सेंटर में जमा कॉपी बदल जाने के लिए सीधे छात्रों को दोषी नहीं माना जा सकता बशर्ते उनके खिलाफ कॉपी बदलने का साक्ष्य न हो। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों के आधार पर अपराध को संदेह से परे साबित किए बगैर केवल अवधारणा के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा आरोप के नोटिस का छात्रों से जवाब लेकर विधिवत जांच में आरोप सिद्ध हुए बगैर उन्हें सामूहिक नकल का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा सीबीएसई बोर्ड साबित नहीं कर सका कि याचियों ने अपनी परीक्षा की कॉपी बदली है। जांच कमेटी यह नहीं कह सकती कि याचियों की उत्तर पुस्तिका पर हस्तलेख भिन्न, है क्योंकि वह हस्तलेख विशेषज्ञ नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक सरन ने शौर्य तिवारी व 10...