मुजफ्फर नगर, अक्टूबर 5 -- ग्राम जलालपुर स्थित श्री पितृदेव स्थान सिंघल परिवार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी ने विदुर एवं ध्रुव चरित्र के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। साध्वी ने बताया कि भगवान कृष्ण प्रेम के भूखे हैं। उन्होंने विदुरानी के दिए केले के छिलके भी सच्चे प्रेम के कारण स्वीकार किए। ध्रुव चरित्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ईश्वर भक्ति के लिए किसी आयु विशेष की प्रतीक्षा आवश्यक नहीं है, केवल मन की एकाग्रता ही पर्याप्त है। कथा के दौरान राजा परीक्षित के मोक्ष और भगवान कपिल द्वारा माता देवहूति को दिए सांख्य दर्शन के उपदेश का भी उल्लेख किया गया।बलराम यह भी पढ़ें- Orai News: श्रीमद्भागवत केवल ग्रंथ नहीं, जीवन को दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान : डॉ. शिव संपत द्विवेदी सिंघल, राजकुमार सिं...