रायबरेली, अगस्त 13 -- रायबरेली, संवाददाता। भारत-पाकिस्तान बंटवारे की आंच आज भी लोगों के जेहन में जल रही है। 79 वर्ष बीतने को हैं लेकिन आज भी लोगों के जेहन में वह तस्वीर जिंदा है। कोई सात साल का था तो कोई दस साल का। सात दशकों में इनकी पूरी जिंदगी बदल गयी है लेकिन यादें आज भी ताजा है। वहां का मंजर आज भी उनके आंखों के सामने कौंध जाता है। पाकिस्तान के गुजरात जनपद के नोसहरा खांजा गांव में जन्म लेने वाले सुरेंद्र सिंह मोगा ने बताया कि उस समय उम्र सात वर्ष की थी। बांटे की आग धधक रही थी, उसी दौरान पिता सरदार मोहर सिंह ने रायबरेली में रहे रहे रिश्तेदारों से बात की और वहां से निकल पड़े। जो वहां था सब छोड़ दिया, किसी तरह वतन में वापसी हुई। जब रायबरेली पहुंचे तो सबसे पहले अमावां विकास खंड के रसेहता में रुकने का स्थान मिला। वहां कुछ दिन रहने के बाद शहर ...