फिरोजाबाद, अगस्त 14 -- नगर में महावीर जिनालय पर आयोजित धर्म सभा में जैन आचार्य निर्भय सागर ने विवाह संस्कार का आध्यात्मिक महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में विवाह करना एक धर्म है। विवाह सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है। शुक्रवार को आयोजित धर्म सभा में जैन मुनि निर्भय सागर ने कहा विवाह से स्त्री और पुरुष दोनों का मन पवित्र रहता है और शारीरिक इच्छाओं की न्यायपूर्वक पूर्ति होती है। उन्होंने कहा कि विवाह के पश्चात पति पत्नी दोनों मिलकर दान, पूजा आदि धार्मिक कार्य करते हैं। इसलिए विवाह को व्यवहार धर्म माना है।आचार्य ने कहा कि स्त्री और पुरुष अंधे-लंगड़े के समान होते हैं। दोनों मिलकर इस जलते हुए संसार से पार होने का प्रयास करते हैं। शादी के समय सात फेरों की व्याख्या करते हुए कहा कि यह जीव नरक से निकलकर मध्यलोक में आया है...