रुडकी, अगस्त 10 -- कुमाऊं की लोक परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़े गौरा-महेश्वर यानी सातूं-आठूं पर्व को लेकर रुड़की में तैयारियां शुरू हो गई हैं। अशोक नगर (ढंडेरा) स्थित कुमाऊं संस्कृति विकास मंडल समिति के अध्यक्ष विजय सिंह बानी ने बताया कि पर्व की शुरुआत बीरूड़ पंचमी से होती है। परंपरा के अनुसार विभिन्न अनाज और दालों को भिगोकर बीरूड़ तैयार किए जाते हैं। महिलाएं दो दिन व्रत रखकर पूजा-अर्चना करती हैं। इसके बाद पारंपरिक लोकगीत और नृत्य का आयोजन होता है। उन्होंने बताया कि पर्व के दौरान महिला और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में सजकर झोड़ा, चाचरी सहित अन्य लोक विधाओं के माध्यम से खेल करते हैं। इन लोकगीतों और नृत्यों में भगवान शिव और माता गौरा के विवाह व कुमाऊं की लोक परंपराओं को दर्शाया जाता है। पर्व के अंतिम चरण में 19 और 20 अगस्त को माता गौरा की वि...