सातवीं मुहर्रम पर मजलिस का आयोजन
रायबरेली, जून 23 -- ऊंचाहार, संवाददाता। एक रात के दूल्हे का पहले बेरहमी से कत्ल, फिर उसकी लाश को घोड़ों की टापों से रौंदना, जालिम की क्रूरता को बयां करता है। इतना विभत्स मंजर को देखकर किसी की भी रूह कांप जाए, लेकिन हुसैन का ईमान नहीं डिगा, और वह उसूलों के लिए लड़ते रहे। मंगलवार सातवीं मुहर्रम पर मजलिस में वक्ताओं ने कर्बला की दास्तां सुनाते हुए उक्त बात कही। मुहर्रम का सातवां दिन कर्बला की जंग का वो मंजर लेकर आता है जब इमाम हुसैन ने अपने भतीजे और हजरत इमाम हसन के बेटे जवान कासिम इब्ने हसन को शहादत के लिए सेहरा सजाकर मैदान में रवाना किया था। यह भी पढ़ें- कुंदरकी में शोहदाए कर्बला की याद में निकला मातमी जुलूस कासिम की एक दिन पहले शादी हुई थी, दूसरे दिन उनका कत्ल करके उनके शव को घोड़ो की टापों से रौंदा गया था। इसलिए सातवीं मुहर्रम का जुलूस मेंह...
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