साक्ष्यों का दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकती पुनरीक्षण अदालत, हाईकोर्ट ने खारिज की पत्नी की याचिका
नई दिल्ली, अक्टूबर 24 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न और मारपीट के मामले में पति समेत आठ आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय ने कहा कि पुनरीक्षण अधिकार क्षेत्र में हाईकोर्ट अपीलीय अदालत की तरह साक्ष्यों का दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकता। बरी करने के आदेश में हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है, जब उसमें स्पष्ट कानूनी त्रुटि, गंभीर अनियमितता या न्याय की विफलता सामने आए। अदालत ने अंजू शर्मा की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। मामले के अनुसार, कानपुर नगर की अंजू शर्मा का विवाह 25 अप्रैल 2007 को गौरव शर्मा के साथ हुआ था। पत्नी का आरोप था कि विवाह के बाद पति गौरव शर्मा, सास माया शर्मा, ससुर एससी शर्मा, जेठ गगन शर्मा और चचिया ससुर महेश चंद्र शर्मा दहेज से संतुष्ट नहीं ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.