नई दिल्ली, मई 25 -- एक स्थानीय कोर्ट ने झारखंड निवासी 23 साल के एक युवक को साइबर धोखाधड़ी मामले में बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति के बैंक खाते में धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम का जमा होना ही, जब तक कि कोई आपराधिक साजिश का सबूत न हो, कोई आपराधिक अपराध नहीं माना जाएगा। गिरगांव कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) एस.जी. चिमनकर ने हाल ही में दिए अपने फैसले में मनोज किस्कू को बरी कर दिया। कोर्ट ने किस्कू को 'संदेह का लाभ' दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष मामले को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में नाकाम रहा। यह भी पढ़ें- मारपीट और बंधक बनाने के मामले में 19 आरोपी बरी यह भी पढ़ें- घर में चोरी के प्रयास मामले में आरोपी बरी

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