साइबर अपराध में म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराना भी बड़ा अपराध : अदालत
गुड़गांव, सितम्बर 23 -- गुरुग्राम, गौरव चौधरी। ऑनलाइन निवेश के ठगी के बढ़ते मामलों को लेकर गुरुग्राम की एक स्थानीय अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई आरोपी साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति से सीधे तौर पर कभी न मिला हो, उससे कोई संपर्क न किया हो और न ही ठगी के व्हाट्सऐप ग्रुप का हिस्सा रहा हो, तब भी केवल म्यूल (फर्जी या किराए के) बैंक खाते उपलब्ध कराना आपराधिक साजिश में उसकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। अदालत ने कहा कि संगठित साइबर अपराध में अलग-अलग लोग अपनी-अपनी भूमिकाएं निभाते हैं।
साइबर अपराध में भूमिका ऐसे में ठगे गए पैसों को ठिकाने लगाने या उनके स्रोत को छिपाने के लिए बैंक खातों की व्यवस्था करना भी इस पूरी आपराधिक साजिश का एक अहम हिस्सा है। इस सख्त टिप्पणी के साथ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वर्षा जैन की अदालत ने 57.4 लाख के ऑनलाइन शेयर ट्रेड...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.