सांख्यिकी की सही समझ से बेहतर होती है शोध की गुणवत्ता
नैनीताल, अक्टूबर 6 -- नैनीताल, संवाददाता। कुमाऊं विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में आयोजित दो दिवसीय सांख्यिकी कार्यशाला का मंगलवार को समापन हुआ। अंतिम दिन प्रतिभागियों को आगमनात्मक व निगमनात्मक दृष्टिकोण, टी-टेस्ट, सहसंबंध, एनोवा और गैर-पैरामीट्रिक परीक्षणों की जानकारी दी गई।सत्र में डॉ. वीरेंद्र प्रताप यादव ने शोध में तार्किकता, प्रतिनिधिक नमूने के चयन, टी-टेस्ट और विश्वास अंतराल का महत्व समझाया। डॉ. अश्विनी कुमार ने सांख्यिकीय परीक्षणों के तार्किक आधार, महत्व स्तर तथा शोध पद्धति व अभिकल्प के अंतर पर प्रकाश डाला। समापन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. ललित तिवारी (निदेशक, डीएसबी परिसर) ने कहा कि आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण शोध की गुणवत्ता बढ़ाता है। कार्यशाला संयोजक प्रो. दीपक पालीवाल ने बताया कि इससे प्रतिभागियों का व्यावहारिक कौशल विक...
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