पीलीभीत, अप्रैल 27 -- पीलीभीत। उद्‌गम चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर एवं गिफ्टेड माइंड्स मैनेज के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला का आयोजन किया गया। निदेशक वैशाली रायजादा ने कहा कि ऑटिज्म (स्वालीनता) एक ऐसी स्थिति है, जिसकी पहचान शुरुआती चरणों में करना बहुत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि समाज में इस विषय पर सही जानकारी फैलाना जिम्मेदारी है। ताकि ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। मुख्य वक्ता डॉ. मोहित कुमार ने ऑटिज्म पर जानकारियां दीं। कहा कि अक्सर अभिभावक बच्चों के विकास में होने वाली देरी को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि 18 से 24 महीने की उम्र इसके लक्षणों को पहचानने का सबसे सही समय है। यह भी पढ़ें- ऑटिज्म से प्रभावित होता है संवाद, व्यवहार : भास्कर अगर बच्चा नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न दे, नजरें नहीं मिला रहा या अपनी उम्र के...