मदुरै, मार्च 6 -- मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने हाल ही में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के तहत एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जब किशोर उम्र के लड़के-लड़कियों के बीच आपसी सहमति से बने संबंधों को अपराध माना जाता है, तो अक्सर युवा लड़कों को ही इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ता है। जस्टिस एन. माला ने एक पॉक्सो मामले में दोषी ठहराए गए एक युवक की सजा को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले अक्सर किशोरों के प्रेम प्रसंगों का माता-पिता द्वारा विरोध किए जाने के कारण दर्ज कराए जाते हैं।क्या बोली अदालत? बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने संबंधों के मामलों में अक्सर युवा लड़के को ही अंजाम भुगतना पड़ता है। माता-पिता के दबाव में लड़की को किसी और से शादी कर...