नई दिल्ली, जनवरी 11 -- सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाए गए POCSO अधिनियम के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि यह कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए एक पवित्र और नेक इरादे का प्रतीक है, लेकिन कई मामलों में यह बदले की भावना से इस्तेमाल किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि इन कानूनों का खासकर उन मामलों में तेजी से दुरुपयोग हो रहा है जहां किशोरों (टीनएजर्स) के बीच सहमति से बने रिश्तों को कठोर आपराधिक कार्रवाई के तहत लाया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से इस समस्या पर गंभीरता से विचार करने और ऐसे मामलों में राहत देने के लिए 'रोमियो-जूलियट क्लॉज' लाने पर विचार करने को कहा है, ताकि वास्तविक किशोर जोड़ों को अनावश्यक आपराधिक मुकदमों से बचाया जा सके। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.