सीवान, अप्रैल 27 -- गुठनी,एक संवाददाता। परमात्मा की प्राप्ति के लिए साधक को सहज होना चाहिए। सहज भाव से परमात्मा की प्राप्ति संभव है। उक्त बातें नेपुरा में चल रहे रुद्र महायज्ञ महायज्ञ में प्रवचन के दौरान सिद्ध गुफ़ा योगाश्रम के महंत रघुनाथदास जी ने कहा। इसी क्रम में आगे उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में नवधा भक्ति का निरूपण करते हुए बताया है कि भगवत्प्राप्ति का सबसे आसान साधन सहजता है। सहज भाव का अर्थ है कि बाह्याडम्बर से मुक्त रहकर अंतर्मुखी होकर उस परमात्मा का नित्य निरंतर चिंतन करते रहना। अधिकांश महात्मा लोग इसी भाव से भजन करके आत्मसाक्षात्कार कर लेते हैं। यह भी पढ़ें- सहज भाव से ही होती है परमात्मा की प्राप्ति: रघुनाथदास मानस में आया भी है कि निर्मल मन जन सो मोहि पावा;मोहि कपट छल छिद्र न भावा"। मन को सांसारिक विषयो ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.