सवर्ण नहीं, दलितों के मुद्दे पर होगा यूपी का विधानसभा चुनाव? क्या कहते हैं आंकड़े
नई दिल्ली, सितम्बर 26 -- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने सियासी बिसात बिछाना शुरू कर दी है। सत्तारूढ़ भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सभी अपनी-अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाते हुए राजनीतिक दांव-पेंच लगा रहे हैं। हालांकि, 2027 के विधानसभा चुनाव में सबकी नजर दलित और अति पिछड़ा वोट बैंक पर है। प्रदेश में करीब 21 फीसदी दलित मतदाता हैं और अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 84 सीटें आरक्षित हैं। ऐसे में दलित मतदाताओं का भरोसा जीतने के लिए सपा जहां 'लाल' से 'नीले' रंग की तरफ बढ़ रही है, वहीं चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम को प्रदेश का प्रभारी बनाकर दलित मतदाताओं को संदेश देने की कोशिश की है।बसपा के प्रति कम हुआ भरोसा? कांग्रेस रणनीतिकार मानते हैं कि बसपा के प्रति दलित मतदाताओं का भरोसा कम हुआ है। 2022 क...
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