चंदौली, मार्च 13 -- चंदौली, संवाददाता। मुकद्दस रमजान माह अब ढलान की ओर बढ़ गया है। इस माह के आखिरी अशरे के 10 दिनों में शब-ए-कद्र की रात होती है। इसे लैलतुल कद्र भी कहा जाता है। यह रात हजार रातों से अफजल है। रमजान की तमाम रातों में यह सबसे सलामती वाली रात मानी जाती है। इस रात रोजेदारों को गुनाहों से तौबा कर अल्लाह की इबादत, जिक्र, दुआ और कुरआन की तिलावत में व्यस्त रहना चाहिए। साथ ही अपने और अपने बुजुर्गों और माता-पिता के मगफिरत के लिए दुआएं करनी चाहिए।मुख्यालय स्थित मदरसे में कारी अली अहमद ने हदीस बयान करते हुए कहा कि शबे कद्र की यह पाक रात रमजान के आखिरी अशरे में आती है। इसे 21, 23, 25, 27 और 29 रमजान की रात में तलाश जा सकता है। हदीस में है कि इस रात में फरिश्ते जमीन पर उतरते हैं। फरिश्ते रोजेदारों के दुओं पर आमीन फरमाते हैं। इस रात में ...
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