नई दिल्ली, मई 28 -- हाईकोर्ट ने पाया है कि एक तरफ जहां आमजन को राहत देने के लिए रेहड़ी-पटरी वालों को सड़क व फुटपाथ से हटाने को लेकर गंभीरता बरती जा रही है, वहीं ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने के लिए लाइसेंस पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली के सभी बड़े बाजारों में इस तरह के मामले सामने आए हैं। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह एवं न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने सरोजनी नगर समेत अन्य बाजारों में रेहड़ी-पटरी पर दुकान की अनुमति लेने पहुंचे कई याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार कर दिया है। यह भी पढ़ें- दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को बड़ी राहत: चिलचिलाती धूप में सिर ठंडा रखेगा 'AC हेलमेट'आपराधिक मुकदमे भी दर्ज पीठ ने कहा कि हैरत की बात यह है कि इन मामलों की सुनवाई के दौरान पता चला कि संबंधित बाजार...