आदित्यपुर, मार्च 23 -- चांडिल,संवाददाता। आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखने के उद्देश्य से आदिवासियों ने रविवार को चांडिल में सेंदरा यात्रा निकाली। इस दौरान एक तीर, एक कमान, आदिवासी एक समान की ही आवाज गूंजती रही। सरहुल के दूसरे दिन झारखंड दिशोम बाहा (सरहुल) समिति, आदिवासी समन्वय समिति, पातकोम दिशोम जाहेरगढ़ समिति के संयुक्त तत्वावधान में सेंदरा (पारंपरिक शिकार उत्सव) का आयोजन किया गया। इसका समापन चांडिल गोलचक्कर स्थित दिशोम जाहेर में हुआ। इस दौरान प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से शिकार की परंपरा का प्रतीकात्मक निर्वहन किया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। मांदर, नगाड़ा और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर हुए सामूहिक नृत्य और गीतों ने माहौल को उत्सवम...