शामली, मई 28 -- शामली। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के पांचवें दिन शीलासिंह ने विद्यारंभ संस्कार एवं स्वर्णप्राशन संस्कार का व्यवहारिक परिचय कराया। पूनम अनेजा ने आघारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (एफएलएन) विषय पर मार्गदर्शन में बताया, किस प्रकार खेल-आधारित गतिविधियों एवं रोचक शिक्षण विधियों के माध्यम से बच्चों को सहज रूप से शिक्षा से जोड़ा जा सकता है।क्षेत्रीय वाटिका प्रमुख सुधा बाना ने शिशु वाटिका की समय-सारिणी के निर्माण एवं उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। प्रशिक्षु महिलाओं ने विभिन्न शैक्षिक खेल प्रस्तुत किए तथा कविता, गीत एवं गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण को रोचक बनाने की विधियां प्रदर्शित की। यह भी पढ़ें- क्रियात्मक शिक्षण से शिशु के सर्वांगीण विकास पर दिया जोर इस अवसर पर प्रधानाचार्या पल्ल...