नई दिल्ली, अक्टूबर 25 -- नीलेश जैन, फिल्म निर्देशक व गीतकार मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा जैसी महान पंक्तियां लिखने वाले पीयूष पांडे का जाना विज्ञापन जगत ही नहीं, देश को भावना का खामोश पाठ पढ़ाने वाले एक बड़े उस्ताद का जाना है। एक इंसान के रूप में वह बेहद भावुक व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। उनके कहे वाक्य जितने प्रसिद्ध थे, उतने ही उनके आंसू भी। उन्होंने विज्ञापन की कोई औपचारिक पढ़ाई नहीं की थी, लेकिन वह इंसानों और उनकी भावनाओं को पढ़ना जानते थे, जिसकी दिल को छू लेने वाली झलक एशियन पेंट्स के उनके विज्ञापनों में मिली। पीयूष जी के अंदर एक बच्चा था, जो खुद भी हंसना जानता था और दूसरों को हंसाना भी। फेविकोल के उनके विज्ञापन एक गुदगुदी पैदा करते थे। कैडबरी के लिए लिखी गई उनकी लाइन कुछ खास है जिंदगी में दरअसल उनकी जिंदादिली की फिलॉस...
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