गोंडा, सितम्बर 23 -- नवाबगंज, संवाददाता। सरयू के तटीय क्षेत्र में बसे मजरों के लोगों का मुसीबत कम नहीं हो रही है। मानसून के आते ही इन्हे कटान और बाढ़ का खतरा मड़राने लगता है। बीते एक दशक में सरयू के कटान से दत्तनगर, साकीपुर, जैतपुर, और दुर्गागंज के कई मजरे अपना अस्तित्व खो चुके हैं। इनके पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होने से सैकड़ों परिवार दूसरे जिलों में जाकर बस गए है। वर्तमान में हो रही कटान से दत्तनगर गांव के बाणी माझा के आधा दर्जन झोपड़ी सरयू के धारा में विलीन हो गए, यहीं नहीं इस मजरे के किसानों की 10 हेक्टेयर से अधिक फसल लगी खेत नदी में तब्दील हो गई। साकीपुर के चहलावा मे भी कई हेक्टेयर खेत जमींदोज हो गई। सरयू के हालिया कटान के मुहाने पर माझा के खेत आ गए हैं। यहां हो रही रोजाना कटान से फसल से लहलहा रही खेत नदी में समाती जा रही है। कटान पी...