रांची, नवम्बर 7 -- झारखंड में पुलिस प्रशासन और जमीन दलालों पर गंभीर आरोप लगाकर शुक्रवार को खुदकुशी करने वाली निशा भगत आदिवासी अधिकारों, सरना धर्म और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए प्रमुखता से आवाज उठाती थीं। वह धर्मांतरित आदिवासियों का आरक्षण समाप्त करने (डी-लिस्टिंग) की पुरजोर वकालत करती थीं और इसे सरना समाज के हकमारी मानती थीं। सरना समेत सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी के कारण आदिवासी समाज में उनकी एक अलग पहचान थी। केंद्रीय सरना समिति की उपाध्यक्ष भी रह चुकी थीं। आदिवासियों की भूमि पर कथित अवैध कब्जे, जमीन की खरीद-बिक्री में अनियमितताओं और आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों को भी प्रमुखता से उठाती थीं। वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने गुमला सीट से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के टिकट पर चुनाव लड़ा था।...