नई दिल्ली, मई 4 -- नई दिल्ली। केंद्र सरकार सैटेलाइट टोल टैक्स सिस्टम में भी करोड़ों यात्रियों की निजिता बरकरार रखेगी। वैश्विक नेविगेशन सैटेलाइट प्रणाली (जीएनएसएस) आधारित इस टोलिंग को लागू करने के लिए ट्रैकिंग नहीं, बल्कि ट्रिगर तकनीक का सहारा लिया जाएगा। संसदीय समिति की कड़ी आपत्ति के बाद सरकार ने डेटा सुरक्षा कानूनों (डीपीडीपी एक्ट) के दायरे में रहते हुए एक नया ब्लूप्रिंट तैयार किया है। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पर्यटन व परिवहन संबंधी संसदीय समिति ने मंत्रालय से सवाल किया था कि यदि किसी वाहन में ओबीयू (ऑन बोर्ड यूनिट) लगा है, तो क्या सरकार को यह पता होगा कि व्यक्ति टोल रोड से उतरने के बाद कहां जा रहा है। समिति का तर्क था कि 'राइट टू प्राइवेसी' के तहत सरकार को केवल सड़क के उपयोग का डेटा रखने का अधिका...
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