नई दिल्ली, मार्च 12 -- अगर कच्चे तेल की कीमतें वित्त वर्ष 2027 में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो केंद्र सरकार पर हर साल अतिरिक्त 3.6 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ सकता है। यह जानकारी एएनआई ने एलारा सिक्योरिटीज नामक संस्था की एक रिपोर्ट के हवाले से दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कम होने के आसार नहीं दिख रहे हैं, जिससे एशिया में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है और ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो सकती हैं।चालू खाता घाटा और रुपए पर दबाव बढ़ने की आशंका रिपोर्ट के अनुसार, अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत पूरे वित्त वर्ष 2027 के दौरान 100 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहती है, तो भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 2 प्रतिशत हो सकता है। यह तब है जब कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल रह...