नई दिल्ली, अप्रैल 15 -- सरकार ने टोल संग्रह प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए डाटा की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए सभी फास्टैग जारी करने वाले बैंकों के लिए वाहन पंजीकरण संख्या (वीआरएन) सत्यापन को जरूरी कर दिया है। यह फैसला उन बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर लिया गया है, जिनमें फास्टैग रीडर द्वारा दर्ज वाहन नंबर और वास्तविक नंबर प्लेट में असमानता पाई गई है। एक अधिकारी ने बताया कि एनएचएआई के पास पिछले कुछ समय से ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि टोल प्लाजा पर फास्टैग रीडर द्वारा पढ़ा गया नंबर और वाहन की असल नंबर प्लेट में अंतर होता है। इस गड़बड़ी के कारण न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ा खतरा है। यह भी पढ़ें- फर्जी वीआईपी फास्टैग काली सूची में डालेगी सरकार बिना सही डाटा के नियम तोड़ने वाले वाहनों को पकड़...
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